एक विधवा की कहानी – III

By   January 7, 2018
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जैसा की आपने पिछले भाग में पढ़ा की सविता वीर का लंड लेने से डर रही थी पढ़िए antarvasna com का अंतिम भाग –

hindi sexy kahani के अन्य भाग –

भाग – १ 

भाग – २ 

भाग – ३ 


वीर  बोला, “ठीक है। मैं लेट जाता हूँ। आप खुद ही मेरा लंड अपनी चूत के अंदर ज्यादा से ज्यादा घुसाने की कोशिश करो!”वीर  सविता  के ऊपर से हट कर लेट गया तो सविता  तुरंत ही वीर  के ऊपर चढ़ गयी। सविता  जोश में एक दम पागल हो रही थी। उसने वीर  के लंड का सुपाड़ा अपनी चूत के बीच रखा और जोर से दबा दिया। वीर  के लंड का सुपाड़ा सविता  की चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया। उसे इस कदर तेज दर्द हुआ कि वो तड़पते हुए तुरंत ही वीर  के ऊपर से हट गयी और लेट गयी। सविता  को बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि इतना दर्द होगा।

 

आखिर वीर  का लंड भी था तो बेहद मोटा। सविता  दर्द के मारे तड़प रही थी। वीर  सविता  के होंठों को चूमने लगा। थोड़ी देर बाद सविता  आसुदा हुई तो वीर  ने कहा, “मेरे ऊपर आ जाओ और मेरा लंड अपनी चूत में और ज्यादा घुसाने की कोशिश करो!”

 

सविता  बोली, “मैं तुम्हारा लंड अपनी चूत में नहीं घुसा पाऊँगी। मुझे बेइंतेहा दर्द हो रहा है। अब तुम ही अपना लंड मेरी चूत में घुसाओ।”

 

वीर  बोला, “बहुत दर्द होगा!”

 

सविता  बोली, “तुम तो मर्द हो। तुम ही अपना लंड मेरी चूत में जबरदस्ती घुसा सकते हो।”

 

वीर  बोला, “ठीक है!”

 

वीर  सविता  की टाँगों के बीच आ गया। उसने सविता  की टाँगों को घुटनों से मोड़ कर उसके कंधों के पास सटा कर दबा दिया। सविता  एक दम दोहरी हो गयी और उसकी चूत उपर की तरफ उठ गयी। वीर  ने अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के बीच रखा। वीर  ने जोर लगाते हुए अपना लंड सविता  की चूत के अंदर दबाना शुरू किया। जैसे ही वीर  का लंड सविता  की चूत में दो इंच घुसा तो सविता  जोर-जोर से चींखने लगी। लेकिन वीर  रुका नहीं और उसने थोड़ा जोर और लगा दिया। सविता  दर्द के मारे तड़पने लगी। उसकी आँखों में आँसू आ गये। उसका सारा जिस्म पसीने से नहा गया। उसकी टाँगें थरथर काँपने लगी। वीर  का लंड सविता  की चूत में तीन इंच तक घुस चुका था। मैं सविता  के पास बैठ गयी और मैंने उसकी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया। सविता  ने मुझे जोर से पकड़ लिया और रोने लगी। वो बोली, “आपा! बेहद दर्द हो रहा है। मैं वीर  का पूरा लंड अपनी चूत के अंदर कैसे ले पाऊँगी!”

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मैंने कहा, “पहली-पहली मर्तबा दर्द तो होता ही है। तुम घबराओ मत, वीर  जब धीरे-धीरे तमाम लंड तुम्हारी चूत में घुसा कर तुम्हें चोदेगा तब तुम्हें खूब मज़ा आयेगा और तुम सारा दर्द भूल जाओगी। उसके बाद तुम्हें वीर  से चुदवाने में कभी दर्द नहीं होगा और तुम चुदाई का पूरा मज़ा ले पाओगी।”

 

वीर  अपना लंड सविता  की चूत में डाले हुए रुका रहा। थोड़ी देर बाद सविता  आसुदा हो गयी। वीर  ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिये। वीर  का लंड अभी भी सविता  की चूत में चार इंच तक ही अंदर बाहर हो रहा था। थोड़ी देर बाद सविता  को मज़ा आने लगा और वो पाँच मिनट की चुदाई के बाद झड़ गयी। वीर  ने अपनी रफ़्तार थोड़ा बढ़ा दी। वीर  हर पंद्रह-बीस धक्कों के बाद एक जोर का धक्का लगाते हुए सविता  की चुदाई करने लगा। जब वो जोर का धक्का लगा देता तो उसका लंड सविता  की चूत के अंदर और ज्यादा गहरायी तक घुस जाता। जब वीर  जोर का धक्का लगा देता तो सविता  दर्द के मारे तड़प उठती थी। सविता  बहुत ज्यादा जोश में थी इसलिए उसे दर्द का ज्यादा एहसास नहीं हो रहा था। वीर  इसी तरह सविता  की चुदाई करता रहा। वो अभी सविता  को ज्यादा तेजी के साथ नहीं चोद रहा था। दस मिनट की चुदाई के बाद सविता  फिर से झड़ गयी तो मैंने पूछा, “अब कैसा लग रहा है?”

 

सविता  बोली, “मज़ा तो आ रहा है लेकिन दर्द भी बेइंतेहा हो रहा है!”

 

मैंने कहा, “अभी वीर  का पूरा लंड तुम्हारी चूत में नहीं घुसा है इसलिए वो तुम्हें धीरे-धीरे चोद रहा है। जब वो अपना पूरा का पूरा लंड तुम्हारी चूत में घुसा देगा तब वो तुम्हारी बहुत तेजी के साथ चुदाई करेगा। उसके बाद तुम्हें चुदवाने में खूब मज़ा आयेगा।”

 

सविता  ने पूछा, “अभी कितना बाकी है?”

 

मैंने कहा, “अभी तक तो वीर  का लंड तुम्हारी चूत में करीब पाँच इंच ही घुसा है!”

 

सविता  बोली, “वीर  से कह दो कि वो अपना पूरा लंड मेरी चूत में जल्दी से घुसा दे। मैं जल्दी से जल्दी चुदवाने का पूरा मज़ा लेना चाहती हूँ!”

 

मैंने कहा, “दर्द बहुत होगा!”

 

वो बोली, “दर्द तो धीरे-धीरे घुसाने में भी हो रहा है!”

 

मैंने वीर  से कहा, “अब तुम पूरी ताकत लगा कर अपना पूरा का पूरा लंड इसकी चूत में घुसा दो!”

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वीर  ने पूरी ताकत के साथ बहुत जोर-जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिये। सविता  दर्द के मारे चींखने लगी। सारा कमरा उसकी चींखों से गूँजने लगा। सविता  ने दर्द के मारे अपने सिर के बाल नोचने शुरू कर दिये। आठ-दस जोरदार धक्कों के बाद वीर  का लंड पूरा का पूरा सविता  की चूत में घुस गया। सविता  दर्द के मारे तड़प रही थी। वीर  ने पूरा लंड घुसा देने के बाद बहुत तेजी के साथ सविता  की चुदाई शुरू कर दी। सविता  दर्द के मारे चींखती रही लेकिन वीर  रुका नहीं। वो बहुत तेजी के साथ सविता  को चोद रहा था।

 

दस मिनट तक तो सविता  बुरी तरह से चींखती रही और फिर धीरे-धीरे चुप होने लगी। अब तक सविता  की चूत ने अपना पूरा मुँह खोल कर वीर  के लंड को अंदर जाने का रास्ता दे दिया था। वीर  भी पूरे जोश के साथ सविता  को चोद रहा था। पाँच मिनट और चुदवाने के बाद सविता  चुप हो गयी। उसकी दर्द भरी चींखें अब जोश भरी सिसकरियों में बदल रही थी।

 

पाँच मिनट और चुदवाने के बाद वो झड़ गयी तो उसे और ज्यादा मज़ा आने लगा। अब वीर  का लंड सविता  की चूत में कुछ आसानी से अंदर बाहर होने लगा था। सविता  भी अब अपने चूत्तड़ उठा-उठा कर चुदवाने लगी थी। मैंने सविता  से पूछा, “अब मज़ा आ रहा है?”

 

वो बोली, “हाँ आपा, अब तो बहुत मज़ा आ रहा है!”

 

मैंने पूछा, “अब दर्द नहीं हो रहा है?”

 

वो बोली, “दर्द तो हो रहा है लेकिन काफ़ी कम।”

 

मैंने वीर  से कहा, “अब तुम पूरी ताकत के साथ तेजी से सविता  की चुदाई शुरू कर दो।”

 

वीर  ने पूरी ताकत लगाते हुए बहुत तेजी के साथ सविता  की चुदाई शुरू कर दी। अब वो सविता  को एक दम आँधी की तरह चोद रहा था। पाँच मिनट की चुदाई के बाद ही सविता  ने “और तेज… और तेज…” कहना शुरू कर दिया तो वीर  ने उसे बुरी तरह से चोदना शुरू कर दिया। सारे कमरे में धप-धप और फच-फच की आवाज़ गूँज रही थी। साथ ही साथ सविता  की जोश भरी किलकारियाँ भी गूँज रही थी। वो “और तेज… और तेज… खूब जोर-जोर से चोदो मेरे जानू… फाड़ दो आज मेरी प्यासी चूत को…” कहते हुए चुदवा रही थी। कबीर  आँखें फाड़े हुए सविता  को पूरे जोश के साथ चुदवाते हुए देख रहा था। सविता  अपने चूत्तड़ उठा-उठा कर वीर  से चुदवा रही थी। वीर  को अब तक सविता  की चुदाई करते हुए करीब पैंतालीस मिनट हो चुके थे। उसने सविता  को चोदने के तुरंत पहले ही मुझे चोदा था इसलिए वो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। दस मिनट तक चुदवाने के बाद सविता  फिर से झड़ गयी।