एक विधवा की कहानी – II

By   January 3, 2018
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जैसा की आपने पिछले पार्ट में पढ़ा की वीर  का लंड अब मेरी चूत में आसानी के साथ अंदर-बाहर होने लगा। वीर  ने मेरी चूचियों को छोड़ कर मेरी कमर को जोर से पकड़ लिया और अपनी रफ़्तार और ज्यादा तेज कर दी थी। अब वो मुझे एक दम आँधी की तरह से चोदने लगा था।पढ़िए hot sexy stories का मस्त भाग –

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भाग – १ 

भाग – २ 

भाग – ३ 


मैं जोर-जोर के हिचकोले खा रही थी। मेरी चूचियाँ उसके हर धक्के के साथ गोल-गोल घूम रही थी। लग रहा था कि जैसे मेरी चूचियाँ गोल-गोल घूम कर नाच रही हों और मेरी चुदाई का जश्न मना रही हो। मुझे ये देख कर बहुत अच्छा लग रहा था। मैं भी पूरी मस्ती में थी। जब वीर  धक्का लगाता तो मैं अपने चूत्तड़ ऊपर उठा देती थी जिस से उसका लंड एक दम जड़ तक मेरी चूत के अंदर दाखिल हो जाता था।

 

इसी तरह वीर  ने मुझे करीब तीस मिनट तक चोदा और उसके बाद मेरी चूत में ही झड़ गया। उसके लंड से इतना ज्यादा रस निकला जैसे वो बहुत दिनो से झड़ा ही ना हो। मेरी चूत उ उसकी मनि से पूरी तरह भर गयी थी। मेरी चूत ने अभी भी उसके लंड को बुरी तरह से जकड़ रखा था इसलिए उसकी मनि की एक बूँद भी बाहर नहीं निकल पायी। मैं भी इस चुदाई के दौरान तीन दफ़ा झड़ चुकी थी। वो अपना लंड मेरी चूत में डाले हुए ही मेरे ऊपर लेटा रहा और मुझे चूमता रहा। मैं भी उसकी पीठ को सहलाते हुए बड़े प्यार से उसे चूमने लगी। हम दोनों इसी तरह करीब दस-पंद्रह मिनट तक लेटे रहे।

 

वीर  का लंड अभी तक मेरी चूत के अंदर ही था। वो अपना लंड मेरी चूत में डाले हुए ही अपनी कमर को इधर-उधर करने लगा तो दो मिनट में उसका लंड फिर से मेरी चूत के अंदर ही सख्त होने लगा। मैं अभी तक जोश में थी। मैंने भी उसके साथ ही साथ अपने चूत्तड़ इधर-उधर करना शुरू कर दिया। पाँच मिनट में ही वीर  का लंड मेरी चूत के अंदर ही एक दम सख्त हो कर लोहे जैसा हो गया तो वीर  ने मुझे फिर से चोदना शुरू कर दिया। पाँच मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गयी तो मैंने वीर  से कहा, “मुझे डॉगी स्टाईल में चुदवाना ज्यादा पसंद है!”

 

वो इंग्लिश नहीं जानता था। वो बोला, “ये कौन सा तरीका है?”

 

मैंने कहा, “तुमने कुत्तिया को कुत्ते से करते हुए देखा है?”

 

वो बोला, “मैं समझ गया। तुम घोड़ी बन कर चुदवाना चाहती हो?”

 

मैंने कहा, “हाँ।”

 

उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया तो मैं डॉगी स्टाईल में हो गयी। वीर  मेरे पीछे आ गया और उसने अपना पूरा का पूरा लंड एक झटके से मेरी चूत में डाल दिया। मुझे थोड़ा दर्द महसूस हुआ तो मेरे मुँह से हल्की सी चींख निकल गयी। पूरा लंड मेरी चूत में घुसा देने के बाद वीर  ने मेरी कमर को पकड़ लिया और मुझे बहुत ही तेजी के साथ चोदने लगा। थोड़ी देर तक तो मैं दर्द से तड़पती रही लेकिन फिर बाद में मैं भी अपने चूत्तड़ आगे पीछे करते हुई वीर  का साथ देने लगी। मुझे साथ देते हुए देख कर वीर  ने अपनी रफ़्तार काफ़ी तेज कर दी।

 

दस मिनट की चुदाई के बाद ही मैं फिर से झड़ गयी। मेरे झड़ जाने के बाद वीर  ने मुझे बहुत ही बुरी तरह से चोदना शुरू कर दिया। वो इतनी जोर जोर के धक्के लगा रहा था कि मैं हर धक्के के साथ आगे की तरफ़ खिसक जा रही थी। वीर  ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और मुझसे ज़मीन पर चलने को कहा। मैं ज़मीन पर आ गयी तो उसने मेरा सिर दीवार से सटा कर मुझे कुत्तिया की तरह बना दिया। उसके बाद उसने बहुत ही बुरी तरह से मेरी चुदाई शुरू कर दी। मेरा सिर दीवर से सटा हुआ था। मैं अब आगे नहीं खिसक पा रही थी इसलिए अब उसका हर धक्का मुझ पर भारी पड़ रहा था।

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घोडी बना कर चोदा

मैं भी पूरे जोश में आ चुकी थी और अपने चूत्तड़ आगे-पीछे करते हुए उससे चुदवा रही थी। वो भी पूरी ताकत के साथ जोर-जोर के धक्के लगाते हुए मेरी चुदाई कर रहा था। कमरे में ‘धप-धप’ और ‘चप-चप’ की आवाज़ हो रही थी। मैं जोश में आ कर जोर -जोर की सिसकारियाँ भर रही थी। सारा कमरा मेरी जोश भरी सिसकरियों से गूँज रहा था। मैं ‘और तेज… और तेज…’ करती हुई एक दम मस्त हो कर वीर  से चुदवा रही थी। आज मुझे वीर  से चुदवाने में जो मज़ा आ रहा था वो मज़ा मुझे शादी के बाद कुछ दिनों तक ही अपने शौहर से चुदवाने में मिला था। आज मैं अपनी ज़िंदगी में दूसरी बार सुहागरात का मज़ा ले रही थी क्योंकि मेरी चूत वीर  के लंड के लिये किसी कुँवारी चूत से कम नहीं थी।

 

वीर  ने मुझे इस बार करीब पैंतालीस मिनट तक बहुत ही बुरी तरह से चोदा। इस बार की चुदाई के दौरान मैं तीन बार झड़ चुकी थी। सारी मनि मेरी चूत में निकाल देने के बाद जब वीर  ने अपना लंड बाहर निकाला तो मैं अपने आप को रोक ना सकी और मैंने उसका लंड चाटना शुरू कर दिया। वो मुझसे अपना लंड चटवा कर बहुत खुश हो रहा था। मैंने वीर  से पूरी मस्ती के साथ सारी रात खूब चुदवाया। सुबह हम दोनों नहाने के लिये एक साथ बाथरूम में गये। वीर  ने बाथरूम में भी बुरी तरह से मेरी चुदाई की। उसके बाद सारा दिन उसने मुझे कईं तरह के स्टाईल में खूब चोदा।

 

रात के आठ बजे मैं वीर  के साथ डीनर के लिये एक होटल में गयी। होटल से लौट कर आने के बाद वीर  ने सारी रात मुझे बहुत ही अच्छी तरह से चोदा। उसने मुझे पूरी तरह से मस्त कर दिया था। तीसरे दिन सुबह के आठ बजे काल-बेल बजी तो मैंने वीर  से कहा, “जा कर देखो। शायद कबीर  आया है!”

 

वीर  ने एक टॉवल लपेट लिया और जा कर दरवाजा खोला तो कबीर  ही था। वीर  कबीर  के साथ मेरे पास आया। कबीर  ने वीर  के सामने ही मुझसे पूछा, “कैसी रही चुदाई!” तो वीर  समझ गया था कि कबीर  को सब कुछ मालूम है।

 

मैंने कहा, “इतनी अच्छी कि मैं बता नहीं सकती!”

 

कबीर  बोला, “वीर  का लंड पसंद आया?”

 

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तो मैंने कहा, “हाँ, बेहद पसंद आया!”

 

कबीर  बोला, “कितनी दफ़ा चोदा वीर  ने?”

 

मैंने कहा, “मैंने तो बस पूरी मस्ती के साथ वीर  से खूब चुदवाया। मैं नहीं बता सकती कि इसने कितनी दफ़ा मेरी चुदाई की। तुम वीर  से पूछ लो, शायद ये बता सके!”

 

कबीर  ने वीर  से पूछा तो उसने कहा, “बारह बार!”

 

कबीर  ने कहा, “शाबाश वीर , बस तुम इसी तरह रश्मि  की चुदाई करते रहो। अभी तो तुम्हें मेरी बीवी की चुदाई भी करनी है!” उसके बाद कबीर  ने मुझसे पूछा, “मैं अपनी बीवी को कब ले आऊँ?”

 

मैंने कहा, “मुझे कल तक खूब जम कर चुदवा लेने दो। कल शाम को तुम अपनी बीवी को ले आना!”

 

कबीर  ने मुझसे कहा, “मैं भी तुम्हारी चुदाई देखना चाहता हूँ। एक बार तुम वीर  से मेरे सामने चुदवा लो!”

 

मैंने वीर  को अपने करीब बुलाया। जब वो मेरे करीब आया तो मैंने उसका टॉवल एक झटके से खींच लिया। वीर  का आठ इंच का खूब मोटा लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया। कबीर  उसके लंड को देखता ही रह गया। वो बोला, “मेरी बीवी तो अभी कुँवारी है। इसका इतना मोटा लंड उसकी चूत में कैसे घुसेगा!”