पति का अमीर दोस्त – II

By   December 26, 2017
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दोस्तों जेसा की आपने पिछले भाग में पढ़ा की में लोकेश के काफी करीब आ गयी थी, hot sexy kahani का यह भाग आपको उत्तेजित कर देगा –

indian sexy kahani के अन्य भाग-

भाग – १ 

भाग – २ 

भाग – ३ 


धीरे धीरे, मैं सामान्य हो गई..
वैसे, लोकेश  बहुत ही डीसेंट आदमी है..
वो काफ़ी प्यार से बात कर रहे थे..
मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था..
बात करते करते, हम लोग अब सबसे ऊपर पहुँच गये थे..
वहाँ का नज़ारा, वाकई में काफ़ी खूबसूरत था..

काफ़ी लोग थे पर सब अंजान थे, सिवाए लोकेश  के..
हमने वहाँ रुक कर स्लाइस पिया और कुछ देर बैठने के बाद.. ..
लोकेश  – प्रिया वो देखो, वहाँ पर जो कमान है वहाँ चलते हैं.. !! वहाँ से नज़ारा और अच्छा दिखेगा.. !!
वहाँ पर सब तरफ सीडियां थीं और दूर पर एक कमान थी पर वहाँ कोई नहीं था..
मैं – सच में.. !! मस्त आइडिया है पर वहाँ तो कोई नज़र नहीं आ रहा.. !! वैसे भी रश्मि और आकाश  भी ऊपर आ रहे होंगे.. !! हमें यहीं रुकना चाहिए.. !!
लोकेश  – अरे, अब चलो भी.. !! उन्हें भी वहीं बुला लेंगे.. !!
मैं – ठीक है.. !! फिर, चलो जल्दी.. !!
हम वहाँ के लिए, निकल गये..
रास्ते में लोकेश  ने अपना हाथ अब मेरे हाथ की जगह, मेरे कंधे पर रख दिया..
मैंने भी कुछ नहीं कहा..
फिर थोड़ी देर बाद, उसने मेरे कमर पर अपना हाथ रख दिया..
अब भी मैंने, कुछ नहीं कहा..
कुछ ही देर में, हम वहाँ पहुँच गये..
कमान के ऊपर से नज़ारा, काफ़ी अच्छा लग रहा था..
वो ऐसी जगह थी, जहाँ से हम सबको देख सकते थे पर कोई भी हमें देख नहीं सकता था..
मैं इतने उँचाई से बाहर का नज़ारा देखने में बिज़ी थी..
इतने में लोकेश  कमर से धीरे धीरे अपना हाथ, अब मेरी गाण्ड पर ले गया..
उसका हाथ, मुझे अपनी नरम गाण्ड पर महसूस होने लगा..
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था..
चूत में मीठी सी चुभन चालू हो चुकी थी और चूत के होंठ खुलने चालू हो गये थे..
मैंने उसकी तरफ देखा..
मैंने भी बड़ी बेशर्मी से उसे मादक स्माइल दी और उसने भी..
लगभग, 1-2 मिनट वैसे ही अपना हाथ मेरी गाण्ड पर रखने के बाद उसने मेरी स्माइल मिलते ही, अब मेरी गाण्ड सहलाना शुरू कर दिया..
वो स्कर्ट के ऊपर से ही, मेरी गाण्ड को सहला रहा था..
उसे मेरी पैंटी भी महसूस हो रही थी..
इधर, हम अभी भी बड़ी सामान्य बातें कर रहे थे..
जैसे की कितना अच्छा व्यू है.. !! कितनी खूबसूरत जगह है.. !!
दोनों ऐसे व्यवहार कर रहे थे, जैसे कुछ अनोखा या अलग हो ही ना रहा हो..
कुछ देर मेरी गाण्ड सहलाने के बाद, वो मेरे पीछे आ गया और मुझे पीछे से पकड़ लिया..
उनका लण्ड, अब ठीक मेरी गाण्ड पर मुझे महसूस हो रहा था और वो मेरी गर्दन पर मुझे किस करने लगा..
मैं – प्लीज़ लोकेश जी.. !! मुझे छोड़ दीजिए.. !! कोई देख लेगा.. !!
लोकेश  – डरो मत, प्रिया.. !! कोई नहीं है.. !!
फिर हम लोग, एक साइड में दीवार के पीछे गये और मैंने कहा – लोकेश , यहाँ करते हैं.. !! वहाँ कोई भी देख लेता,यार.. !!
लोकेश  काफ़ी खुश हो गया और बोला – मुझे ऐसी औरतें बहुत पसंद है जो ज़्यादा नखरे ना करें.. !! पर आप तो ऐसे मान गईं, जैसे कोई रांड़ अपने ग्राहक के इंतेज़ार में बैठी हो.. !!
मुझे महसूस हुआ की मैंने बहुत जल्दी कर दी पर नखरे नौटंकी का वक़्त भी तो नहीं था..
आकाश  और रश्मि, कभी भी आ सकते थे..
खैर, अब लोकेश  ने भी मेरी असलियत को समझ लिया और उसने अपने होंठ मेरे होंठ पर लगा दिए और बड़ी बेदर्दी से किस करने लगा..
अबकी बार वो सामने था इसलिए उसका लण्ड, मेरी चूत पर टकरा रहा था और उसके हाथ, मेरी गाण्ड को सहला रहे थे..
मैं उसके बालों को पकड़ कर, उसे किस कर रही थी..
किस करने के बाद, उसने मेरी टी शर्ट के अंदर हाथ डालकर मेरे मम्मों को सहलाना शुरू किया..
उसके एक हाथ में, मेरा एक संतरा आ गया..
अब मैं भी उसका साथ अच्छे से देने लगी और अपने हाथ उसके हाथ पर रख कर, अपने बूब्स उससे ज़ोर ज़ोर से दबवाने लगी..
धीरे धीरे उसका एक हाथ, अब मेरा स्कर्ट उठाने लगा लेकिन मैंने तुरंत उसे रोक दिया..

मैं – नहीं.. !! प्लीज़ नहीं.. !! ये सही जगह नहीं है.. !!
लोकेश  – प्लीज़ प्रिया.. !! अब और इंतेज़ार नहीं होता.. !! कितने नरम दूध और गाण्ड है, तुम्हारे.. !! जी तो चाह रहा है,अभी तुम्हारे कपड़े फाड़ दूँ और तुम्हें पटक पटक कर चोद डालूं.. !! माँ चुदाए, आकाश  और रश्मि.. !!
मैं – अगर ऐसा है तो हट जाओ.. !! मुझे नहीं करना, तुम्हारे साथ अब कुछ.. !!
लोकेश , थोडा होश में आ गया..
लोकेश  – ठीक है.. !! माफ़ करना, मैं बहुत ज़्यादा उतेज्ज़ित हो गया था.. !! पर फिर, कब करेंगे हम.. !!
मैं – ये टूर ख़तम होने के बाद.. !! देहरादून में.. !!
लोकेश  – ठीक है.. !!
फिर कुछ देर तक हम हाथ में हाथ लिए, वहाँ पर बैठ गये..
बातें करते करते, वो मुझे सहला भी रहा था..

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मेरा नमकीन बदन

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कुछ देर बाद, वो बोला..
लोकेश  – मिसेस शुक्ला.. !! प्लीज़ कुछ प्लान बनाओ, यार.. !! इसी टूर पे मुझे तुम्हें चोदना है.. !!
मैं – मैं भी तुमसे चुदने के लिए बेताब हूँ पर बात को समझो.. !! मैं नहीं चाहती की कोई प्राब्लम हो.. !!
मैं तो शुरू से ही, लोकेश  पर मेहरबान हो गई थी..
रांड़ तो मैं थी ही, अब तक समझ चुकी थी की लोकेश  का बैंक बैलेंस काफ़ी अच्छा था..
उसके पिता एक होटेल के मलिक थे और मैं ताड़ चुकी थी के उससे मुझे काफ़ी फायदा होगा..
वैसे भी वो काफ़ी स्मार्ट था..
मैंने काफ़ी देर तक उसको सहलाने दिया.. फिर, हम लोग उठ गये और वापस सेंटर फ़ोर्ट पर आ गये..

अभी तक रश्मि और आकाश , ऊपर नहीं आए थे..
फिर हम नीचे गये, उन्हें देखने पर वो वहाँ पर भी नहीं थे..
लोकेश  और मैं, फिर उन दोनों को ढूंढने लगे..
उस वक़्त, आकाश  और रश्मि के मोबाइल्स भी नहीं लग रहे थे..
काफ़ी ढूंढने के बाद, लोकेश  वापस वहीं पर आकर सोफे टाइप पठार पर बैठ गये..
फिर, मैं उन्हें ढूंढने के लिए दूसरे साइड में गई..
भूल भुलिया में एक जगह कॉर्नर पर, मुझे वो दोनों दिखाई दिए..
मैं दीवार के पीछे छुपकर, उन दोनों को देखने लगी..
आकाश  ने रश्मि की गाण्ड पर हाथ रखा हुआ था और रश्मि भी स्माइल दे देकर, उससे बात कर रही थी..
मुझे समझने में देर नहीं लगी के मामला क्या है..

मुझे बड़ा हल्का महसूस हुआ क्यूंकी मैं सोचती थी कि इतने शरीफ आदमी की शादी, मुझ जैसी “छमिया” से हो गई..
रश्मि की गाण्ड पे आकाश  के हाथ ने सच में, मेरे दिल का बोझ हल्का कर दिया था..
मैंने उन्हें डिस्टर्ब नहीं किया और वापस आकर, लोकेश  के साथ बैठ गई..
थोड़ी देर में, वो दोनों आए..
लोकेश  – कहाँ गये थे, आप लोग.. !! ?? हम ऊपर जाकर, वापस आ गये पर आप लोग ऊपर नहीं आए.. !! ??
रश्मि – मेरे पैरों में काफ़ी दर्द हो रहा है इसलिए मैंने ही आकाश  को कहा के ऊपर नहीं जाते हैं.. !! मुझे प्यास भी लगी थी इसलिए हम लोग स्प्राइट पीने, यहीं पर बाजू के स्टॉल पर गये थे.. !!
लोकेश  – चलो, ठीक है.. !! अब काफ़ी देर हो गई है.. !! वापस चलते हैं क्यों के अभी एक और फ़ोर्ट पर भी जाना है.. !!
फिर हम दूसरे फ़ोर्ट से, सीधे होटल में आ गये..
मैं अपने पति आकाश  को काफ़ी अब्ज़र्व कर रही थी, उस दूसरे फ़ोर्ट पर..
वो और रश्मि, काफ़ी आँख मिचोली खेल रहे थे..
जैसा मैंने बताया की मैं भी खुश थी..
ऐसे भी, आकाश  अगर रश्मि में बिज़ी रहेगा तो मुझे लोकेश  के साथ मौका मिल जाए..
अगले दिन, पुष्कर जाने का प्लान था..
पुष्कर, जोधपुर से लगभग 200-220 किलोमीटर पर होगा..
सुबह के 6 बजे, मैं उठ गई और आकाश  को उठाने लगी..
मैं – आकाश , उठो अब.. !! मैं तो तैयार भी हो चुकी हूँ.. !! पुष्कर मंदिर के दर्शन के लिए जाना है.. !! उठो ना.. !!
आकाश  – मेरी तबीयत ठीक नहीं है.. !! पैर काफ़ी दर्द दे रहे हैं.. !! मैं नहीं जा पाउँगा.. !! प्लीज़, तुम उनके साथ चली जाना.. !!
मैं – नहीं, उठो जल्दी.. !! तुम्हें भी आना होगा.. !!
इतने में, डोर बेल बजी..
लोकेश  आए थे..
वो अंदर आ गये..
मैं – देखो ना.. लोकेश जी.. !! ये उठ नहीं रहे.. !! काफ़ी देर हो चुकी है.. !! कहते हैं के पैरों में दर्द है.. !!
लोकेश  ज़ोर से, हँसने लगे..
लोकेश  – यही हाल, रश्मि का भी है.. !! उसकी भी तबीयत खराब हो गई है.. !! वो भी नहीं आना चाहती.. !!
लोकेश  काफ़ी खुश लग रहा था, ये सब सुनकर क्यों के वो भी मेरे साथ अकेले वक़्त गुज़रना चाहता था..